
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में पश्चिम बंगाल से जुड़ा एक बड़ा अवैध माइनिंग नेटवर्क सामने आया है, जिसमें एक कथित ‘लाला’ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि यह व्यक्ति फर्जी परमिट और नकली पैड के जरिए अवैध खनन से जुड़े ट्रकों को पुलिस की मिलीभगत से ग्रीन सिग्नल दिलवाता था। इस पूरे नेटवर्क में अवैध खनन और परिवहन को संरक्षण देने के लिए स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे रैकेट की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और कई अहम खुलासे होने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में केवल ट्रांसपोर्टर ही नहीं, बल्कि कुछ प्रभावशाली स्थानीय लोग और कथित बिचौलिये भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई मामलों में ट्रकों को बिना उचित जांच के ही आगे बढ़ने दिया जाता था।
ईडी अब इस पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और संदिग्ध कंपनियों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध कमाई का पैसा किन रास्तों से सफेद किया गया। एजेंसी को शक है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि बड़े स्तर पर फैला हो सकता है।



