एंटीबायोटिक का ज्यादा सेवन बना खतरा, बैक्टीरिया के जीन में बदलाव का RMRC अध्ययन में खुलासा

एंटीबायोटिक का जरूरत से ज्यादा और बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। हाल ही में रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अत्यधिक एंटीबायोटिक उपयोग के कारण बैक्टीरिया के जीन में बदलाव हो रहा है। यह बदलाव बैक्टीरिया को पहले से ज्यादा ताकतवर और दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बना रहा है, जिससे सामान्य संक्रमणों का इलाज भी कठिन होता जा रहा है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि बार-बार एंटीबायोटिक के संपर्क में आने से बैक्टीरिया अपनी संरचना में ऐसे आनुवंशिक परिवर्तन कर लेते हैं, जिनकी वजह से उन पर दवाओं का असर कम या पूरी तरह खत्म हो जाता है। इस स्थिति को ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ कहा जाता है, जो आने वाले समय में वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। RMRC के शोधकर्ताओं के अनुसार, सर्दी-खांसी, बुखार या मामूली संक्रमण में भी एंटीबायोटिक लेने की आदत इस समस्या को और गंभीर बना रही है, क्योंकि इन बीमारियों में अक्सर एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं होती। इसके अलावा, अधूरा कोर्स लेना भी बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उन्हें और मजबूत बना देता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अस्पतालों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में बिना पर्चे के एंटीबायोटिक की उपलब्धता इस खतरे को तेजी से बढ़ा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते एंटीबायोटिक के उपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में सामान्य सर्जरी, प्रसव या छोटी-सी चोट भी जानलेवा साबित हो सकती है। RMRC ने लोगों को जागरूक करते हुए सलाह दी है कि एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लें, पूरा कोर्स जरूर पूरा करें और खुद से दवा बंद न करें। साथ ही, सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों को भी दवाओं की बिक्री पर सख्त नियम लागू करने की जरूरत है। यह अध्ययन साफ संकेत देता है कि एंटीबायोटिक का विवेकपूर्ण उपयोग ही इस बढ़ते खतरे को रोकने का एकमात्र रास्ता है।



