
मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण संघर्ष अब दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। युद्ध की शुरुआत उस समय और तेज हो गई जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र में भूचाल ला दिया। इस घटना के बाद तेहरान समेत कई बड़े शहरों में हालात बेकाबू हो गए और ईरानी सेना ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल बेस और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाकर लगातार हवाई हमले किए, जिसके चलते राजधानी तेहरान में भारी तबाही देखने को मिली। कई इलाकों में इमारतें ढह गईं, बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित हो गई और हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए। दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी हमले करते हुए इजरायल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे तेल अवीव और आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया। अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ा दी है और कई एयरक्राफ्ट कैरियर भी तैनात किए गए हैं ताकि ईरान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष को लेकर चिंतित है, क्योंकि इससे पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध का खतरा पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। युद्ध के दस दिनों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जबकि तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं रुका तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस युद्ध के अगले कदम पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात शांत होंगे या यह संघर्ष और भी बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।



