
गूगल ने हैदराबाद में 15 अरब डॉलर की लागत से दुनिया के सबसे बड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब की नींव रख दी है। यह प्रोजेक्ट न केवल भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, बल्कि दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को भी नया मोड़ दे रहा है। हैदराबाद को पहले से ही “सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया” कहा जाता है, और अब गूगल का यह निवेश उसे वैश्विक AI मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
तेलंगाना सरकार ने इस निवेश को राज्य के लिए एक “गेम चेंजर” बताया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट न केवल लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खोलेगा बल्कि शिक्षा, हेल्थकेयर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इस AI हब में मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में रिसर्च होगी।
हालांकि, इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में नाराजगी देखी जा रही है। आंध्र के कुछ नेताओं का कहना है कि यह निवेश संयुक्त राजधानी के अधिकारों के उल्लंघन के समान है, जबकि कर्नाटक के उद्योग मंत्री ने कहा कि “हैदराबाद की सफलता से हमें प्रेरणा मिलती है, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है।” वहीं तेलंगाना के आईटी मंत्री के.टी. रामाराव ने मजाकिया लहजे में कहा, “हमारी तरक्की देखकर कुछ पड़ोसियों को जलन हो रही है, लेकिन यह हमारे लिए गर्व की बात है।”
गूगल के अधिकारियों के अनुसार, यह हब 2030 तक पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएगा और इसमें अत्याधुनिक तकनीक के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी का भी उपयोग किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि भारत में AI आधारित समाधान विकसित करने के लिए यह केंद्र वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत की डिजिटल इकोनॉमी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा और हैदराबाद को भविष्य में “ग्लोबल AI कैपिटल” बनने का अवसर देगा। यह पहल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बराबर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



