
यूक्रेन स्थित दुनिया की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली न्यूक्लियर साइट चेरनोबिल एक बार फिर सुर्खियों में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूसी हमले के बाद चेरनोबिल परमाणु संयंत्र की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। चेरनोबिल वही जगह है, जहां 1986 में हुए भीषण परमाणु हादसे ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। उस दुर्घटना के प्रभाव आज भी महसूस किए जाते हैं और ऐसे में किसी भी तरह की तकनीकी या सुरक्षा चूक को बेहद गंभीर माना जाता है।
बिजली आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर न्यूक्लियर साइट की सुरक्षा प्रणालियों पर पड़ता है। चेरनोबिल में रिएक्टर भले ही बंद हैं, लेकिन वहां मौजूद रेडियोधर्मी कचरे को सुरक्षित रखने के लिए लगातार निगरानी और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है। बिजली न होने की स्थिति में बैकअप जनरेटर और वैकल्पिक सिस्टम पर निर्भरता बढ़ जाती है, जो लंबे समय तक सुरक्षित समाधान नहीं माने जाते। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो रेडिएशन रिसाव का खतरा बढ़ सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान चेरनोबिल क्षेत्र कई बार सैन्य गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) पहले भी इस साइट की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुकी है। युद्ध के बीच किसी परमाणु स्थल की बिजली आपूर्ति का ठप होना न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप और दुनिया के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। हवा और पानी के जरिए रेडिएशन फैलने की आशंका हमेशा बनी रहती है, जिसका असर सीमाओं तक सीमित नहीं रहता।
यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि वे हालात पर नजर बनाए हुए हैं और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव के कारण हालात और जटिल हो गए हैं। वैश्विक समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और परमाणु स्थलों को किसी भी तरह के सैन्य संघर्ष से दूर रखने की अपील कर रहा है।


