
भारत और इजरायल के बीच संबंध अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा देते हुए रक्षा, तकनीक, कृषि, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने का संकल्प लिया है। पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और सामरिक सहयोग में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिसने इस साझेदारी को मजबूती प्रदान की है। अब दोनों देश साल 2026 के अंत तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
FTA लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और आयात-निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। भारत को इजरायल की अत्याधुनिक कृषि तकनीक, जल प्रबंधन प्रणाली, रक्षा उपकरण और स्टार्टअप इकोसिस्टम से लाभ मिलेगा, वहीं इजरायल को भारत जैसे विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग पहले से ही मजबूत है, और FTA से इसमें और विस्तार की संभावना है।
इसके अलावा, नवाचार और स्टार्टअप सेक्टर में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। जलवायु परिवर्तन, स्मार्ट सिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। भारत की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” पहल को भी इजरायली निवेश और तकनीकी सहयोग से गति मिल सकती है।
विशेष रणनीतिक साझेदारी का यह नया चरण न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत और इजरायल का यह सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास को मजबूत करेगा। यदि वर्ष के अंत तक FTA पर सहमति बन जाती है, तो यह दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाएगी और भविष्य में सहयोग के नए द्वार खोलेगी।



