
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर एक अहम संकेत सामने आया है कि अमेरिकी कानून की धारा 232 के तहत लगाए जाने वाले स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी, क्योंकि इन उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ लंबे समय से व्यापारिक तनाव का कारण बने हुए हैं। धारा 232 के तहत अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर स्टील और एल्युमीनियम आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे भारत समेत कई देशों के निर्यात प्रभावित हुए। भारत लगातार इस मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ताओं और बहुपक्षीय मंचों पर उठाता रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का फोकस टैरिफ कटौती के बजाय बाजार पहुंच, सप्लाई चेन सहयोग और निवेश बढ़ाने पर अधिक हो सकता है। ऐसे में धारा 232 जैसे संवेदनशील मुद्दों को फिलहाल समझौते से बाहर रखने की संभावना जताई जा रही है। इससे दोनों देशों को बिना किसी बड़े राजनीतिक या कानूनी टकराव के व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत की ओर से यह तर्क दिया गया है कि भारतीय स्टील और एल्युमीनियम निर्यात अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं, बल्कि वहां की इंडस्ट्री को कच्चे माल और ऑटो सेक्टर को मजबूती देते हैं।
ऑटो पार्ट्स सेक्टर के लिए भी यह खबर अहम है, क्योंकि अमेरिका भारतीय ऑटो कंपोनेंट्स का बड़ा बाजार है। यदि इन उत्पादों पर टैरिफ यथावत रहते हैं या भविष्य में राहत की दिशा में अलग से बातचीत होती है, तो भारतीय कंपनियों को निर्यात रणनीति बनाने में स्पष्टता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल धारा 232 को बाहर रखना एक व्यावहारिक कदम है, जिससे व्यापक व्यापार समझौते की राह आसान हो सकती है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में धारा 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ को बाहर रखने की संभावना को संतुलित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ेगा और भविष्य में इन संवेदनशील मुद्दों पर अलग से समाधान निकालने का रास्ता खुलेगा, जो दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
