
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कूटनीतिक समझ रखने वाले शशि थरूर ने पाकिस्तान को लेकर एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अब भारत रिश्ते सुधारने के लिए पहला कदम नहीं बढ़ाएगा। लंबे समय से भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं और कई मौकों पर भारत ने दोस्ताना हाथ बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद, सीमा पार हमले और राजनीतिक बयानबाज़ी ने उन प्रयासों को विफल कर दिया। ऐसे में शशि थरूर का यह बयान भारत की मौजूदा कूटनीति और जनमानस की भावनाओं को मजबूती से दर्शाता है।
भारत ने हमेशा शांति और सहयोग की नीति अपनाई है। चाहे अटल बिहारी वाजपेयी का लाहौर दौरा हो या नरेंद्र मोदी का नवाज शरीफ को अचानक मुलाकात में जन्मदिन की शुभकामनाएँ देना—हर बार भारत ने मित्रतापूर्ण रुख दिखाया। लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान की ओर से पुलवामा जैसे आतंकी हमले, सीमा पर गोलीबारी और उकसाने वाली हरकतें होती रहीं। इन हालातों ने भारत को यह समझने पर मजबूर किया कि रिश्तों की बहाली का रास्ता तभी खुलेगा, जब पाकिस्तान अपनी नीतियों और कार्यशैली में बदलाव लाएगा।
शशि थरूर का कहना है कि अब भारत को इंतजार करना चाहिए कि पाकिस्तान ईमानदारी से दोस्ती की पहल करे। बार-बार भारत की ओर से कदम बढ़ाने से न तो ठोस परिणाम मिले और न ही स्थायी शांति स्थापित हो पाई। इसलिए अब वही देश आगे बढ़े, जिसने रिश्ते बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। यह बयान कहीं न कहीं भारत की दृढ़ विदेश नीति को भी उजागर करता है, जो आतंकवाद और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि थरूर का यह रुख केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है कि भारत अब “नो फर्स्ट मूव” की नीति पर काम करेगा। यानी जब तक पाकिस्तान ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक भारत रिश्तों में सुधार की पहल नहीं करेगा। यह पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट चेतावनी भी है कि सिर्फ बयानों और खोखले वादों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर शांति और आतंकवाद पर कड़े कदम उठाने होंगे।
भारत की जनता भी लंबे समय से यही चाहती रही है कि सरकार पाकिस्तान के प्रति सख्त रवैया अपनाए। थरूर का बयान इसी जनभावना का प्रतिबिंब है। भारत-पाक रिश्तों में सुधार तभी संभव है, जब दोनों देश समान रूप से प्रयास करें। अब जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है कि वह शांति की दिशा में आगे आए।
इस प्रकार शशि थरूर का यह बयान एक निर्णायक और साहसिक रुख को सामने लाता है। यह न केवल भारत की कूटनीतिक मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अब भारत को बार-बार धोखे में नहीं डाला जा सकता। रिश्तों का रास्ता पाकिस्तान से होकर ही गुजरेगा, और पहला कदम अब उसी को बढ़ाना होगा।



