
भारत की तेजी से बढ़ती विकास यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना ली है। इसी क्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में आयोजित ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्फ्रेंस (GEC) में कहा कि भारत की प्रगति को अब कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने अपने संबोधन में अमेरिका समेत अन्य वैश्विक शक्तियों को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने विकास और रणनीतिक हितों में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं करेगा। जयशंकर ने भारत की आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक क्षमताओं पर जोर देते हुए कहा कि देश अब केवल विकास की गाथा सुनाने वाला नहीं है, बल्कि वैश्विक निर्णयों में सक्रिय और प्रभावशाली भागीदार बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का दृष्टिकोण सहयोगात्मक है, लेकिन वह अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों के प्रति सख्त रवैया अपनाने में भी संकोच नहीं करेगा। उनके इस बयान ने वैश्विक मंच पर यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब अपनी रणनीति और निर्णयों में पूरी तरह आत्मनिर्भर और निर्णायक भूमिका निभा रहा है। GEC के मंच से जयशंकर ने भारतीय नवाचार, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटलीकरण के माध्यम से भारत की आर्थिक ताकत का भी बखान किया। उन्होंने कहा कि भारत में निवेश करने वाले देशों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है, क्योंकि भारत की युवा शक्ति, तकनीकी नवाचार और निवेश के अनुकूल वातावरण इसे वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में मदद कर रहा है। साथ ही, उन्होंने अमेरिका समेत अन्य देशों को यह संदेश दिया कि भारत के विकास मार्ग में कोई भी बाहरी दबाव असर नहीं डाल सकता। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह संबोधन भारत की वैश्विक छवि को और मजबूत करने वाला है और यह संकेत देता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी आवाज़ और प्रभाव को और दृढ़ता से प्रस्तुत कर रहा है। उनके इस दृढ़ संदेश ने यह भी साबित कर दिया कि भारत अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर निर्णय लेने वाले देशों की सूची में शामिल है। इससे न केवल भारत के आर्थिक और राजनीतिक हित सुरक्षित होंगे, बल्कि देश की वैश्विक साख और कूटनीतिक शक्ति भी और मजबूत होगी।



