
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता को 272 गीगावाट के पार पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि देश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा जैसे स्रोतों के विस्तार ने भारत को वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा के अग्रणी देशों में शामिल कर दिया है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न मिशन और नीतिगत सुधारों के चलते निवेश और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिला है।
इसी कड़ी में भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच ऑफशोर विंड टास्कफोर्स की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य समुद्र में पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विकास, तकनीकी सहयोग, निवेश और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। ब्रिटेन ऑफशोर विंड ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी देशों में से एक है और उसका अनुभव भारत के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। भारत के तटीय राज्यों में अपार पवन ऊर्जा क्षमता मौजूद है, जिसे अब संगठित और वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
ऑफशोर विंड परियोजनाएं न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में सहायक होंगी, बल्कि रोजगार सृजन, बंदरगाह अवसंरचना विकास और स्थानीय उद्योगों को भी मजबूती देंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग भारत को 2030 तक निर्धारित नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भी भारत की भागीदारी और मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, 272 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता का आंकड़ा पार करना और ब्रिटेन के साथ ऑफशोर विंड टास्कफोर्स की शुरुआत भारत की हरित ऊर्जा यात्रा में मील का पत्थर है। यह पहल आने वाले वर्षों में देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास के नए आयाम तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी।



