
भारत ने पड़ोसी देश भूटान की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए उसके डिजिटलीकरण में सहयोग देने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज, पारदर्शी और अधिक सुलभ बनाना है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस संदर्भ में कहा कि न्यायिक प्रणाली में डिजिटल तकनीक के उपयोग से न केवल मामलों के निपटारे की गति बढ़ेगी, बल्कि अपराधों पर भी प्रभावी तरीके से लगाम लगाई जा सकेगी।
दरअसल, डिजिटल न्यायिक व्यवस्था के तहत अदालतों में ई-फाइलिंग, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाता है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी न्यायिक प्रणाली में बड़े पैमाने पर तकनीकी बदलाव किए हैं। ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट और ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं के माध्यम से देश में न्याय तक पहुंच को आसान बनाया गया है। इसी अनुभव को साझा करते हुए भारत अब भूटान की न्यायिक प्रणाली को भी डिजिटल रूप से मजबूत करने में मदद करना चाहता है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब न्यायिक प्रक्रियाएं डिजिटल हो जाती हैं तो मामलों के रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं, पारदर्शिता बढ़ती है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होती हैं। साथ ही अपराध से जुड़े मामलों में जांच और सुनवाई की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनती है। इससे अपराधियों को सजा मिलने में तेजी आती है और कानून का डर भी बढ़ता है।
भारत और भूटान के बीच हमेशा से घनिष्ठ और मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे का सहयोग करते रहे हैं, चाहे वह आर्थिक विकास हो, शिक्षा, ऊर्जा या फिर तकनीकी सहयोग। न्यायिक क्षेत्र में यह नया सहयोग दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भूटान में भी डिजिटल न्यायिक प्रणाली लागू होती है तो वहां के नागरिकों को न्याय पाने में आसानी होगी और अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिलेगी। भारत का यह प्रस्ताव दक्षिण एशिया में न्यायिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।



