
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत में इजरायल के राजदूत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि ईरान के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तो इसका असर भविष्य में भारत समेत कई देशों के रणनीतिक और आर्थिक हितों पर पड़ सकता था। राजदूत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना केवल इजरायल की जरूरत नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ईरान की गतिविधियों को लेकर लंबे समय से कई देशों में चिंता बनी हुई थी और अगर इन्हें अनदेखा किया जाता तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। उन्होंने खास तौर पर यह भी उल्लेख किया कि भारत जैसे देश, जो ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर मध्य-पूर्व पर निर्भर हैं और जिनका व्यापारिक आवागमन समुद्री मार्गों से होता है, उनके लिए क्षेत्रीय अस्थिरता बड़ा जोखिम बन सकती है। राजदूत ने कहा कि इजरायल की कार्रवाई किसी देश के खिलाफ नहीं बल्कि सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल हमेशा आतंकवाद और आक्रामक गतिविधियों के खिलाफ खड़ा रहा है और इस दिशा में वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। भारत-इजरायल संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और रक्षा, तकनीक, कृषि तथा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। राजदूत ने भरोसा जताया कि भारत और इजरायल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा हालात में देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि किसी भी तरह के खतरे को समय रहते रोका जा सके। उनके अनुसार यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो भविष्य में इसका प्रभाव सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों पर भी पड़ सकता था। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए जरूरी है कि वह क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के प्रयासों का समर्थन करे और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर काम करे।



