यूपी विधानसभा में उठा शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि का मुद्दा, सरकार ने दिया सकारात्मक संकेत

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। विभिन्न दलों के विधायकों ने प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति का सवाल उठाते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। सदन में कहा गया कि वर्षों से शिक्षामित्र सीमित मानदेय पर काम कर रहे हैं, जबकि उनकी जिम्मेदारियां और कार्यभार लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उन्हें सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए ताकि वे पूरी निष्ठा और उत्साह के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकें।
चर्चा के दौरान सदन में यह भी उल्लेख किया गया कि शिक्षामित्र ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में भी वे विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। विधायकों ने तर्क दिया कि यदि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने आश्वासन दिया कि शिक्षामित्रों के मानदेय से जुड़ा विषय संवेदनशील है और इस पर सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है और शिक्षामित्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण मानती है। वित्तीय पहलुओं का अध्ययन कर जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार पहले ही कई कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से शिक्षकों और शिक्षामित्रों को लाभ पहुंचा रही है। साथ ही, उनकी सेवा शर्तों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सदन में दिए गए इस आश्वासन के बाद शिक्षामित्रों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही उन्हें आर्थिक राहत मिल सकती है।



