यूपी के 10 प्राकृतिक पर्यटन स्थल पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे, 27 फरवरी तक मांगे गए प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने प्रदेश के 10 प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के संचालन और विकास को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य इन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना, पर्यटकों की संख्या बढ़ाना और स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित करना है। विभाग ने इच्छुक निजी कंपनियों और निवेशकों से 27 फरवरी तक प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से पर्यटन स्थलों का बेहतर प्रबंधन, रखरखाव और प्रचार-प्रसार संभव हो सकेगा।
पीपीपी मॉडल के तहत चयनित कंपनियां इन प्राकृतिक स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास करेंगी, जिसमें पर्यटक सुविधाएं, पार्किंग, कैफेटेरिया, एडवेंचर एक्टिविटीज, स्वच्छता प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था शामिल होगी। इससे न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार पहले ही पर्यटन को विकास का प्रमुख आधार मानते हुए कई योजनाएं चला रही है, और यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्राकृतिक स्थलों का योजनाबद्ध और पेशेवर तरीके से संचालन किया गया, तो उत्तर प्रदेश देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार की यह पहल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ाने के साथ-साथ निवेशकों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकती है।
पर्यटन विभाग ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक होगी। सभी प्रस्तावों का मूल्यांकन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। 27 फरवरी तक प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में और भी पर्यटन स्थलों को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जा सकता है। इस निर्णय से प्रदेश के पर्यटन उद्योग में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है।



