
संसद के भीतर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई जब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। चर्चा के दौरान रिजिजू ने कहा कि आजकल कुछ लोग खुद को बहुत बड़ा ज्ञानी समझते हैं और देश को ज्ञान देने की कोशिश करते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है। उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी की टिप्पणियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि संसद जैसे गंभीर मंच पर तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ बात करनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का स्वागत है, लेकिन जब आलोचना तथ्यों से दूर और केवल राजनीतिक लाभ के लिए की जाती है तो इससे जनता के बीच भ्रम फैलता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार देश के विकास, सुरक्षा और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है, जबकि कुछ नेता केवल बयानबाजी के जरिए सुर्खियां बटोरने की कोशिश करते हैं। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से अपील की कि वह रचनात्मक भूमिका निभाए और संसद की गरिमा बनाए रखे। इस दौरान सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने भी रिजिजू के बयान का समर्थन किया और विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस की ओर से भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार सवालों से बचने के लिए विपक्ष पर निशाना साध रही है। संसद में हुई इस नोकझोंक के बाद सियासी माहौल और गरमा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस तरह की बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल संसद में हुई इस टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है और दोनों दलों के समर्थक सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और राजनीतिक रंग ले सकता है, क्योंकि विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के मूड में है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की कोशिश कर रही है।
