मिशन कर्मयोगी: 31 मार्च तक तीन कोर्स पूरे करना अनिवार्य, iGOT पर अपलोड होगी रिपोर्ट

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी कर्मचारियों की दक्षता, कौशल और कार्यक्षमता को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि वे 31 मार्च तक कम से कम तीन ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (कोर्स) अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने के बाद उनकी रिपोर्ट iGOT (Integrated Government Online Training) पोर्टल पर अपलोड करना भी आवश्यक होगा। सरकार का मानना है कि सतत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बन सकेगी।
मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य केवल औपचारिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी कर्मचारियों में नए कौशल, डिजिटल दक्षता, व्यवहारिक क्षमता और प्रोफेशनल एप्रोच विकसित करने की एक व्यापक पहल है। iGOT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पाठ्यक्रम विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, जिनमें नीति निर्माण, प्रशासनिक सुधार, वित्तीय प्रबंधन, ई-गवर्नेंस, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा से जुड़े विषय शामिल हैं। कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं, लेकिन तय समयसीमा के भीतर उन्हें पूरा करना अनिवार्य होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षण की प्रगति और कोर्स पूर्णता की निगरानी iGOT डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी द्वारा समय पर कोर्स पूरे नहीं किए जाते या रिपोर्ट अपलोड नहीं की जाती है, तो इसका प्रभाव उनके वार्षिक मूल्यांकन (APAR) और भविष्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में कर्मचारियों को समय रहते प्रशिक्षण पूरा करने के लिए प्रेरित करें और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं।
मिशन कर्मयोगी को प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप एक भविष्य-केंद्रित सिविल सेवा सुधार माना जा रहा है, जिसमें सीखना एक निरंतर प्रक्रिया होगी। 31 मार्च की समयसीमा को देखते हुए कर्मचारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे iGOT पोर्टल पर लॉगिन कर जल्द से जल्द अपने कोर्स पूरे करें और प्रमाणपत्र व रिपोर्ट अपलोड कर अनुपालन सुनिश्चित करें। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि शासन प्रणाली भी अधिक सशक्त और परिणामोन्मुख बनेगी।



