
स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कई बड़े एलान किए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण घोषणा भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी रही। पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब ‘मिशन मोड’ में समुद्र के भीतर से तेल और गैस निकालने की दिशा में काम करेगा। यह कदम न केवल देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में सहायक होगा, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा योगदान देगा।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आयात पर अत्यधिक निर्भर है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की भारी मात्रा में खरीद विदेशों से करनी पड़ती है। इसके कारण न केवल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार खर्च होता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की अस्थिरता से भी भारत प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में भारत अपने समुद्री क्षेत्रों से तेल निकालने की तकनीक को मज़बूत करेगा और इस मिशन में देशी-विदेशी कंपनियों की विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि भारत के समुद्री इलाकों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार मौजूद है। अब तक इसका उपयोग सीमित पैमाने पर हुआ है, लेकिन ‘मिशन मोड’ में काम होने से उत्पादन क्षमता में कई गुना बढ़ोतरी होगी। इससे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को घरेलू स्तर पर पूरा करना संभव हो सकेगा।
इस घोषणा को आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक और बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह भारत ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करना शुरू किया है, उसी तरह अब तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन में भी भारत नई ऊँचाइयाँ छुएगा।
इसके अलावा, इस मिशन से लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। समुद्री तेल और गैस परियोजनाओं से न केवल प्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे, बल्कि इससे जुड़े अन्य उद्योगों – जैसे परिवहन, मशीनरी, इंजीनियरिंग और अनुसंधान – में भी व्यापक अवसर बनेंगे।
पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मिशन में पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। समुद्र की जैव विविधता और पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचाए बिना, आधुनिक तकनीक का उपयोग कर तेल एवं गैस का दोहन किया जाएगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उन्नत तकनीकी निवेश को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का यह एलान भारत की ऊर्जा रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है। अगर यह मिशन सफलतापूर्वक लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत तेल आयात पर अपनी निर्भरता कम करके एक मजबूत ऊर्जा निर्यातक भी बन सकता है। यह पहल न केवल आर्थिक मजबूती का आधार बनेगी, बल्कि भारत की वैश्विक स्थिति को भी और सशक्त करेगी।



