
मलेशिया की यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे में इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए मित्र देशों का सहयोग, बेहतर समन्वय और साझा रणनीति बेहद जरूरी है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब तक आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुटता नहीं दिखाई जाएगी, तब तक शांति और स्थिरता का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल रहेगा।
वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, निवेश, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई अहम विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि भारत और मलेशिया के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों देशों की साझेदारी अहम भूमिका निभा सकती है।
आतंकवाद पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कट्टरपंथ और चरमपंथ मानवता के दुश्मन हैं। इनसे लड़ने के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान, आतंक वित्तपोषण पर रोक और संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश आतंकवाद को पनाह देते हैं या उसे समर्थन देते हैं, उनके खिलाफ सख्त वैश्विक रुख अपनाया जाना चाहिए।
मलेशिया के नेतृत्व ने भी आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया और आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करने, संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। इस यात्रा को भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह संदेश सिर्फ मलेशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई ही स्थायी शांति का रास्ता खोल सकती है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाता रहा है और अब मित्र देशों के साथ मिलकर इसे और प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है।
