यूपी कौशल विकास मिशन की नई ग्रेडिंग नीति लागू, अब प्रदर्शन तय करेगा प्रशिक्षण केंद्रों की रैंकिंग

उत्तर प्रदेश में कौशल आधारित रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित यूपी कौशल विकास मिशन (UPSDM) ने प्रशिक्षण केंद्रों के लिए नई ग्रेडिंग नीति लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश भर के सभी प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन उनके प्रदर्शन, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों की दक्षता और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर किया जाएगा। पहले जहां कई केंद्र केवल नाममात्र की औपचारिकताओं के आधार पर संचालित हो रहे थे, वहीं अब उन्हें अपनी गुणवत्ता साबित करनी होगी। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जो केंद्र युवाओं को वास्तविक कौशल और रोजगार उपलब्ध कराने में सफल होंगे, उन्हें ही आगे अवसर दिए जाएंगे।
नई ग्रेडिंग नीति के तहत केंद्रों को A, B, C और D श्रेणियों में बांटा जाएगा। A ग्रेड पाने वाले केंद्रों को अधिक ट्रेड, अतिरिक्त सीटें और नई परियोजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले केंद्रों पर कार्रवाई भी संभव होगी। यदि कोई केंद्र लगातार खराब ग्रेड प्राप्त करता है, तो उसका पंजीकरण निरस्त करने तक की व्यवस्था की गई है। इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
यूपी कौशल विकास मिशन का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र बांटना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करना है। नई नीति में उद्योगों के साथ समन्वय, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और प्लेसमेंट प्रतिशत को प्रमुख मानदंड बनाया गया है। इससे प्रशिक्षण केंद्रों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ग्रेडिंग सिस्टम प्रदेश में स्किल इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहन और कमजोर संस्थानों को सुधार का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और कुशल प्रोफेशनल बनें। नई ग्रेडिंग नीति इसी दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है।



