
अमेरिका में चल रहे टैरिफ घमासान के बीच भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों पर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है और अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए जा रहे या प्रस्तावित टैरिफ का असर बहुआयामी हो सकता है। ऐसे में भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और लचीली है, इसलिए किसी भी बाहरी झटके का सामना करने की क्षमता रखती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार निर्यातकों, उद्योग संगठनों और संबंधित मंत्रालयों के साथ लगातार संवाद में है ताकि संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सके। अमेरिका की व्यापार नीतियों में बदलाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन, कच्चे माल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ सकता है, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत पर भी दिख सकता है। हालांकि, सीतारमण ने भरोसा जताया कि भारत ने पिछले वर्षों में अपने निर्यात बाजारों का विविधीकरण किया है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैरिफ युद्ध तेज होता है तो आईटी, ऑटो पार्ट्स, फार्मा और स्टील जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, लेकिन साथ ही कुछ सेक्टरों को नए अवसर भी मिल सकते हैं। वित्त मंत्री का यह बयान संकेत देता है कि भारत फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाए हुए है और अंतरराष्ट्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाए रखेगा।



