
संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के प्रतिनिधि और सांसद निशिकांत दुबे ने पाकिस्तान को उसके झूठ और दोहरे मापदंडों पर करारा जवाब दिया है। पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने दृढ़ता और सटीक शब्दों में उसे आईना दिखाया। निशिकांत दुबे ने अपने संबोधन में पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा, “भाषण देना बंद करें और पहले खुद को आईने में देखें।”
दुबे ने संयुक्त राष्ट्र में अपने वक्तव्य के दौरान पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत के आंतरिक मामलों में दखल देता है, जबकि खुद आतंकवाद का गढ़ बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि “पाकिस्तान को पहले अपने यहां अल्पसंख्यकों की स्थिति, मानवाधिकार उल्लंघन और आतंकवादी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए, फिर दूसरों पर उंगली उठानी चाहिए।”
भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय नहीं बल्कि भारत का आंतरिक मामला है, जिसमें किसी बाहरी देश को बोलने का अधिकार नहीं है।
निशिकांत दुबे ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपने नागरिकों को गरीबी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद से जूझने के लिए छोड़ कर हर बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत-विरोधी भाषण देकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दुनिया आज पाकिस्तान की असलियत जान चुकी है और कोई भी देश उसके झूठे दावों पर भरोसा नहीं करता।
भारत की इस दृढ़ प्रतिक्रिया ने संयुक्त राष्ट्र में मौजूद सभी प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने भी दुबे के बयान की सराहना की और कहा कि भारत ने एक बार फिर संयम और सच्चाई के साथ पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब किया है।
इस भाषण ने साफ कर दिया कि भारत अब किसी भी मंच पर पाकिस्तान के झूठे आरोपों को अनसुना नहीं करेगा, बल्कि हर बार ठोस सबूतों और तर्कों के साथ उसका जवाब देगा। निशिकांत दुबे का यह रुख भारत की सशक्त और आत्मनिर्भर विदेश नीति की झलक पेश करता है।



