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छह वर्षों में भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या—सरकार ने संसद में दी जानकारी

सरकार ने संसद (लोकसभा और राज्यसभा) में जानकारी दी है कि वर्ष 2018 से 2023 (जून तक) के दौरान करीब 11 लाख (≈ 10.93 लाख) भारतीयों ने अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी और अन्य देशों की नागरिकता ग्रहण की।

बताना चाहें कि विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखा गया जवाब देते हुए बताया कि:

  • 2023 (जून तक) में लगभग 87,026 भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी

  • वहीं 2022 में यह संख्या थी 2,25,620

  • 2021 में तेज़ी से बढ़ कर 1,63,370 लोग नागरिकता त्याग चुके थे

  • 2020 में यह संख्या थी 85,256

यदि हम केवल 2018‑2023 का योग देखें तो कुल नागरिकता त्यागने वालों की संख्या लगभग 11 लाख से अधिक है।

सरकार का कहना है कि यह प्रवृत्ति व्यक्तिगत कारणों—जैसे बेहतर रोजगार, जीवन स्तर, शिक्षा या रहन‑सहन के अवसरों के लिए—देश से बाहर बसने वाले भारतीयों की ओर बढ़ी है। इसके साथ ही भारत में डुअल सिटिजनशिप नहीं होने के कारण, विदेशी नागरिकता स्वीकार करने पर स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता कट जाती है ।

विदेश मंत्री जयशंकर ने पिछले तीन वर्षों (2020–22) में 5.61 लाख से अधिक नागरिकों द्वारा छोड़ने का आंकड़ा लोकसभा में साझा किया था ।

इसके अतिरिक्त, अगर आप 2011 से 2022 तक का कुल आंकड़ा देखना चाहें, तो उस अवधि में 1.66 लाख (16 लाख से अधिक) भारतीयों ने नागरिकता त्यागी है जिसमें से 2022 साल (2.25 लाख) सबसे अधिक था ।

🧩 सारांश सारणी (2019–2023)

वर्ष नागरिकता त्यागने वालों की संख्या
2019 1,44,017
2020 85,256
2021 1,63,370
2022 2,25,620
2023 (जून तक) 87,026
कुल (2019–23) लगभग 5.05 लाख

✅ निष्कर्ष

  • पिछले 6 वर्षों (2018–2023) में लगभग 11 लाख भारतीयों ने विदेशी नागरिकता ग्रहण करते हुए अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी।

  • यह प्रवृत्ति हर वर्ष बढ़ी है, खासकर 2022 में जब सबसे अधिक संख्या (2.25 लाख) दर्ज की गई।

  • सरकार इसे व्यक्तियों के व्यक्तिगत और पेशेवर कारणों से जोड़ती है, और प्रवासी भारतीयों को ‘देश की संपत्ति’ भी मानती है।

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