
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बच्चों के सर्वांगीण विकास को देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है, जब उसके बच्चे शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त हों। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बच्चों को पौष्टिक भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि कुपोषण आज भी देश के कई हिस्सों में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जो बच्चों के विकास में बाधा डालता है। ऐसे में जरूरी है कि हर बच्चे तक संतुलित आहार पहुंचे और उन्हें स्वस्थ वातावरण मिले।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों, रचनात्मकता और जीवन कौशल का समावेश होना चाहिए। बच्चों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे अपनी प्रतिभा को पहचान सकें और उसे विकसित कर सकें। राष्ट्रपति मुर्मू ने आंगनबाड़ी और मिड-डे मील जैसी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इनका सही क्रियान्वयन बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति ने अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपील की कि वे बच्चों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं और उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में बच्चों को सही दिशा देना और भी जरूरी हो गया है, ताकि वे तकनीक का सही उपयोग कर सकें और गलत प्रभावों से बच सकें।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि हम आज बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर ध्यान देंगे, तो आने वाले समय में भारत एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में उभरेगा। बच्चों का समग्र विकास ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव है, और इसे सुनिश्चित करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।



