125 साल बाद लौटी भारत की अमूल्य धरोहर: बुद्ध अवशेष प्रदर्शनी का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध अवशेष प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर इसे भारत के लिए गर्व और गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि लगभग 125 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत की एक अमूल्य विरासत अपने देश लौटकर आई है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए करुणा, शांति और सहअस्तित्व का संदेश हैं। बुद्ध के अवशेषों की यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक चेतना और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि औपनिवेशिक काल में भारत की कई बहुमूल्य धरोहरें देश से बाहर चली गई थीं, लेकिन आज भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को पुनः स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है। बुद्ध अवशेषों की वापसी उसी प्रयास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज के तनावपूर्ण और हिंसक विश्व में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं, जहां शांति, संवाद और मानव मूल्यों की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि यह प्रदर्शनी केवल ऐतिहासिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को भी दर्शाती है, जिसमें पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बुद्ध के जीवन, उनके विचारों और उनके संदेशों को समझें और उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें। पीएम मोदी ने कहा कि भारत सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, पुनरुद्धार और वैश्विक मंच पर उनके प्रचार-प्रसार के लिए लगातार काम कर रही है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी से जुड़े सभी विद्वानों, पुरातत्व विशेषज्ञों और आयोजकों की सराहना की, जिनके प्रयासों से यह ऐतिहासिक पल संभव हो पाया। अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि बुद्ध अवशेष प्रदर्शनी न केवल भारतवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ेगी, बल्कि दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों और शोधकर्ताओं को भी भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराएगी, जिससे शांति और सद्भाव का संदेश वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगा।



