
पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात को लेकर भारत ने एक बार फिर सक्रिय कूटनीतिक पहल दिखाई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ओमान, कुवैत और कतर के शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने शांति, स्थिरता और संवाद के माध्यम से समाधान पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का असर न केवल क्षेत्रीय देशों पर, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ता है। भारत के लाखों प्रवासी नागरिक इन देशों में काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और कुशलता भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। बातचीत में मानवीय सहायता, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत ने हमेशा संतुलित और रचनात्मक भूमिका निभाई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कतर और कुवैत जैसे ऊर्जा साझेदार देशों के साथ भारत के मजबूत आर्थिक संबंध हैं, वहीं ओमान के साथ सामरिक और समुद्री सहयोग भी महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में यह संवाद दर्शाता है कि भारत क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करता है और हर संभव सहयोग के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत वार्ता और कूटनीति को ही स्थायी समाधान का रास्ता मानता है। मौजूदा परिस्थितियों में भारत की यह पहल वैश्विक मंच पर उसकी जिम्मेदार और भरोसेमंद छवि को और मजबूत करती है।



