
बजट 2026 के बाद आयोजित एक महत्वपूर्ण वेबिनार में Narendra Modi ने देश के समग्र विकास के लिए कौशल विकास, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में निवेश और नवाचार से न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है और यदि युवाओं को सही कौशल और अवसर मिलें, तो वे दुनिया में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। इसलिए सरकार का लक्ष्य स्किल डेवलपमेंट को और अधिक मजबूत बनाना है, ताकि नई तकनीकों और उद्योगों की मांग के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश के हर नागरिक को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश किया गया है और आने वाले समय में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पर्यटन क्षेत्र को भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर पूरी दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती है, इसलिए पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों को मजबूती मिलेगी।
खेलों के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री ने विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल युवाओं को स्वस्थ और अनुशासित बनाते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिष्ठा भी बढ़ाते हैं। इसी कारण सरकार खेल सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि संस्कृति देश की पहचान और आत्मा होती है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी हितधारकों से अपील की कि वे इन क्षेत्रों में मिलकर काम करें और बजट में किए गए प्रावधानों को जमीन पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान और समाज मिलकर प्रयास करें, तो भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।

