
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न हालिया तनाव और संभावित बाधाओं पर भारत का स्पष्ट और संतुलित रुख पेश किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए होर्मुज का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की रुकावट न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत किसी भी प्रकार की बाधा को स्वीकार नहीं करेगा और इस मुद्दे का समाधान शांति, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है।
उन्होंने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता का समर्थन किया है। भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में सरकार लगातार संबंधित देशों के साथ संपर्क में है और स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। मोदी ने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने का है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुटता दिखाएं। मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलित और स्वतंत्र रही है, और देश किसी भी दबाव में आकर निर्णय नहीं लेता।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने भारतीय जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए हैं। विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय मिलकर स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा, लेकिन साथ ही शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी प्रयास जारी रहेंगे।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। उनके इस संतुलित और दृढ़ संदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो भारत की जिम्मेदार वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।



