
प्रधानमंत्री Narendra Modi की आगामी इजरायल यात्रा को लेकर इजरायल के राजदूत Reuven Azar ने इसे “ऐतिहासिक” करार दिया है। उनका कहना है कि यह दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं होगा, बल्कि भारत और Israel के बीच रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम साबित होगा। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में उल्लेखनीय मजबूती आई है। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी लगातार गहरी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी की पिछली इजरायल यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को एक नया आयाम दिया था और अब यह आगामी यात्रा उसी विश्वास और सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मानी जा रही है।
रुवेन अजार के अनुसार, भारत और इजरायल के संबंध साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और नवाचार की भावना पर आधारित हैं। इजरायल भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देखता है। रक्षा क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, अत्याधुनिक तकनीक का आदान-प्रदान और मेक इन इंडिया के तहत सहयोग को और विस्तार देने की संभावनाएं हैं। साथ ही, कृषि तकनीक और जल संरक्षण के क्षेत्र में इजरायली विशेषज्ञता भारत के ग्रामीण विकास और खाद्य सुरक्षा लक्ष्यों को मजबूत कर सकती है।
यह यात्रा पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत और इजरायल की साझेदारी स्थिरता और नवाचार का मॉडल बन सकती है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहल से नई आर्थिक संभावनाएं खुल सकती हैं।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास को और सुदृढ़ करेगा। भारत की “एक्ट वेस्ट” नीति और इजरायल की वैश्विक साझेदारी रणनीति के बीच सामंजस्य दिखाई देता है। रुवेन अजार ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ साझा दृष्टिकोण रखते हैं और सुरक्षा सहयोग भविष्य में और गहरा होगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित इजरायल यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत का संकेत है। यह दौरा रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग और तकनीकी नवाचार को नई दिशा देगा, जिससे भारत-इजरायल संबंध और अधिक सशक्त एवं व्यापक बनेंगे।



