
प्रधानमंत्री Narendra Modi का प्रस्तावित Russia दौरा भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच दशकों पुराना भरोसेमंद रिश्ता रहा है, जो समय के साथ और गहरा होता गया है। इस यात्रा के दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और रूस की साझेदारी नई दिशा तय कर सकती है। खासकर ऊर्जा क्षेत्र में रूस भारत का एक प्रमुख सहयोगी बनकर उभरा है, जहां सस्ती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराने से भारत को काफी लाभ मिला है।
प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के बीच होने वाली बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों पर जोर दिया जाएगा। दोनों देश 2030 तक अपने व्यापार को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा होगी, क्योंकि रूस लंबे समय से भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है। संयुक्त सैन्य अभ्यास और अत्याधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान से दोनों देशों की सुरक्षा साझेदारी और सुदृढ़ होगी।
इस यात्रा का एक अहम पहलू यह भी है कि भारत और रूस बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। चाहे वह United Nations हो या ब्रिक्स और एससीओ जैसे समूह, दोनों देश वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करते हैं। वर्तमान वैश्विक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को और मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का यह रूस दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगा। आने वाले समय में इस यात्रा के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा।



