
भारतीय वायुसेना (IAF) के चार राफेल लड़ाकू विमान ऑस्ट्रेलिया पहुंच गए हैं, जिससे रक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। हालांकि यह किसी आपात सैन्य तैनाती का हिस्सा नहीं, बल्कि बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘Pitch Black 2026’ में भागीदारी के लिए किया गया रणनीतिक अभ्यास है।
इस अभ्यास में भारतीय दल के साथ चार राफेल विमान, दो C-17 परिवहन विमान और 120 से अधिक वायु योद्धा शामिल हैं। यह अभ्यास ऑस्ट्रेलिया के डार्विन, टिंडल और एम्बरली जैसे एयरबेस क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा।
Pitch Black जैसे अभ्यासों में अलग-अलग देशों की वायु सेनाएं एक साथ प्रशिक्षण करती हैं, जिससे पायलटों को बड़े स्तर के हवाई अभियानों, रणनीतिक समन्वय और आधुनिक युद्ध परिस्थितियों का अनुभव मिलता है। इस बार करीब 19 देशों की वायु सेनाएं इसमें हिस्सा ले रही हैं।
राफेल की मौजूदगी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इस अभ्यास में अमेरिका और अन्य देशों के आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ संचालन का मौका मिलेगा। ऑस्ट्रेलिया खुद F-35A स्टील्थ लड़ाकू विमानों का संचालन करता है, जिनकी पांचवीं पीढ़ी की क्षमताएं दुनिया भर में चर्चा का विषय रही हैं।
भारत के लिए यह अभ्यास कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इससे राफेल की लंबी दूरी की तैनाती क्षमता, पायलटों के कौशल और मित्र देशों के साथ सैन्य तालमेल को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
राफेल और F-35 जैसे विमानों की तुलना अक्सर की जाती है, लेकिन दोनों अलग-अलग श्रेणी के लड़ाकू विमान हैं। राफेल एक 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर है, जबकि F-35 को स्टील्थ तकनीक से लैस पांचवीं पीढ़ी का विमान माना जाता है। दोनों की भूमिका और डिजाइन उद्देश्यों में अंतर है।
इस तैनाती को भारत की बढ़ती रक्षा कूटनीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।



