फाइलेरिया मुक्त यूपी का संकल्प: हर पात्र तक दवा पहुंचाने पर सरकार का जोर, 15 यूनिट पर विशेष निगरानी

उत्तर प्रदेश को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को और तेज कर दिया है। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि अभियान के दौरान हर पात्र व्यक्ति को अनिवार्य रूप से दवा खिलाई जाए, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ा जा सके। फाइलेरिया एक मच्छर जनित बीमारी है, जो लंबे समय तक शरीर को प्रभावित कर विकलांगता तक का कारण बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत घर-घर जाकर दवा वितरण और सेवन सुनिश्चित कराया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों, आशा बहुओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा लेने से वंचित न रहे।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिन क्षेत्रों में दवा सेवन की प्रगति अपेक्षाकृत कम रही है, वहां की 15 यूनिट को चिन्हित कर विशेष निगरानी में रखा गया है। इन यूनिटों में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार समीक्षा की जा रही है और फील्ड विजिट भी बढ़ा दी गई हैं। स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को दवा के महत्व और उसके सुरक्षित होने के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति दूर की जा सके। सरकार का मानना है कि जब तक 100 प्रतिशत पात्र आबादी दवा का सेवन नहीं करेगी, तब तक फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी का मिशन है। सामुदायिक सहयोग, जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और स्वास्थ्य टीमों की सक्रियता से ही फाइलेरिया मुक्त यूपी का सपना साकार हो सकेगा। विशेष निगरानी और सघन रणनीति के जरिए सरकार आने वाले समय में बेहतर परिणाम की उम्मीद जता रही है, ताकि प्रदेश को इस गंभीर बीमारी से स्थायी राहत मिल सके।



