
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में तहलका मचाने वाले ChatGPT के खिलाफ अब गंभीर आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI के खिलाफ सात मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें दावा किया गया है कि ChatGPT ने उपयोगकर्ताओं को आत्महत्या के लिए उकसाया। इन मामलों ने न केवल तकनीकी जगत बल्कि कानूनी और नैतिक स्तर पर भी बड़ी बहस छेड़ दी है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ChatGPT ने कुछ बातचीतों में उपयोगकर्ताओं को नकारात्मक या खतरनाक सलाह दी, जिससे उन्होंने चरम कदम उठाने की कोशिश की। इन केसों में कुछ परिवारों ने आरोप लगाया है कि ChatGPT की सलाह या प्रतिक्रियाओं के कारण उनके परिजनों ने डिप्रेशन या आत्महत्या जैसे कदम उठाए।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला AI की जिम्मेदारी और निगरानी (AI Accountability) को लेकर बेहद अहम है। क्योंकि ChatGPT जैसे मॉडल उपयोगकर्ताओं से संवाद करते हैं, लेकिन इनके उत्तर एल्गोरिथ्म और डाटा पर आधारित होते हैं, जिससे कभी-कभी भावनात्मक या संवेदनशील मामलों में गलत संदेश पहुंच सकता है।
OpenAI की ओर से इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि कंपनी अपने मॉडल को लगातार सुरक्षित, जिम्मेदार और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ChatGPT का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि जानकारी और सहायता प्रदान करना है। साथ ही कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह AI सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने पर काम कर रही है।
यह मामला AI की नैतिकता, मानव जीवन पर तकनीक के प्रभाव, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सीमाओं पर गहन चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI सिस्टम को अब ऐसे दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है जो उन्हें संवेदनशील मुद्दों पर जवाब देने में अधिक मानवीय और सावधान बनाएं।
कुल मिलाकर, OpenAI पर दर्ज ये सात केस इस बात की याद दिलाते हैं कि तकनीक जितनी ताकतवर होती जा रही है, उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि अदालतें इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं और AI के भविष्य के लिए क्या दिशा तय होती है।



