
सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर थार के तपते रेगिस्तान तक, भारतीय सेना की हर तैनाती में कुछ ऐसे ‘स्पेशल साथी’ भी कदम से कदम मिलाकर चलते हैं, जिनका योगदान अमूल्य है। ये साथी कोई और नहीं, बल्कि सेना के प्रशिक्षित डॉग्स, खच्चर, घोड़े और अन्य सहायक पशु हैं, जो विषम परिस्थितियों में सैनिकों की आंख, कान और ताकत बनते हैं। सियाचिन जैसे दुर्गम इलाके में, जहां ऑक्सीजन की कमी और जानलेवा ठंड मानव क्षमताओं को चुनौती देती है, वहीं सेना के डॉग्स हिमस्खलन में फंसे जवानों की तलाश, दुश्मन की हलचल की पहचान और चौकसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूसरी ओर, थार के रेगिस्तान में खच्चर और घोड़े लंबे काफिलों के साथ रसद पहुंचाने, दुर्गम टीलों को पार करने और सीमाई चौकियों तक जरूरी सामान ले जाने में सैनिकों का भरोसेमंद सहारा बनते हैं। इन ‘स्पेशल साथियों’ को अत्याधुनिक प्रशिक्षण, संतुलित आहार और बेहतरीन देखभाल दी जाती है, ताकि वे हर मौसम और हर मिशन में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें। सेना इनके लिए विशेष वेटनरी सुविधाएं, मेडिकल चेकअप और आराम की व्यवस्था सुनिश्चित करती है। हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने इन वीर साथियों के सम्मान और कल्याण को लेकर कई पहलें की हैं—सेवानिवृत्ति के बाद गोद लेने की योजनाएं, स्मृति समारोह और वीरता के लिए विशेष प्रशंसा पत्र भी दिए जाते हैं। युद्ध के मैदान में जब मानव और पशु का यह अनोखा तालमेल दिखाई देता है, तब स्पष्ट होता है कि देश की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदना और साझेदारी से भी मजबूत होती है। इन चार पैरों वाले वीरों ने अनगिनत बार अपनी जान जोखिम में डालकर सैनिकों की रक्षा की है और मिशनों की सफलता में निर्णायक योगदान दिया है। सियाचिन की बर्फ हो या थार की रेत—भारतीय सेना के ‘स्पेशल साथी’ हर मोर्चे पर राष्ट्रभक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा की मिसाल कायम करते हैं, और सच मायनों में देश उनका ऋणी है।



