
भारत के लिए गर्व का क्षण है कि असम कैडर की भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी सोनाली घोष को प्रतिष्ठित IUCN केंटन मिलर अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान पाने वाली वह पहली भारतीय महिला बन गई हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार पर्यावरण और वन संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। सोनाली घोष को यह सम्मान उनके असाधारण कार्यों और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन के प्रति समर्पण के लिए दिया गया है।
सोनाली घोष वर्तमान में असम के प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की फील्ड डायरेक्टर हैं। उनके नेतृत्व में इस पार्क ने न केवल गैंडों की तादाद बढ़ाने में सफलता पाई, बल्कि अवैध शिकार पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। उन्होंने तकनीकी नवाचार, समुदाय की भागीदारी और सतत् संरक्षण के सिद्धांतों के माध्यम से वन्यजीव सुरक्षा के नए मानक स्थापित किए हैं।
केंटन मिलर पुरस्कार को पर्यावरण संरक्षण जगत का “नोबेल पुरस्कार” भी कहा जाता है। यह हर वर्ष ऐसे व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में उत्कृष्ट नेतृत्व दिखाया हो। सोनाली घोष का यह सम्मान भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की वन सेवा और संरक्षण प्रयासों की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
सोनाली घोष ने अपने करियर के दौरान कई नवाचार किए, जैसे पार्क मैनेजमेंट में डिजिटल सर्विलांस सिस्टम, एंटी-पोचिंग पेट्रोलिंग नेटवर्क और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रमों की शुरुआत। उनकी पहल से न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा बढ़ी, बल्कि आसपास के ग्रामीणों की आजीविका भी सुधरी।
यह सम्मान भारतीय महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व क्षमता और पर्यावरण क्षेत्र में उनकी भागीदारी का भी प्रतीक है। सोनाली घोष ने इस उपलब्धि के साथ यह साबित किया है कि समर्पण, निष्ठा और नवाचार के बल पर कोई भी व्यक्ति वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
निष्कर्षतः, सोनाली घोष की यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए गौरव का विषय है बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में प्रेरित करेगी।



