
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच से एक बार फिर दुनिया को सतर्क करते हुए बड़ा संदेश दिया है। बिना किसी देश या नेता का नाम लिए उन्होंने इशारों-इशारों में उन ताकतों पर निशाना साधा, जो आज के दौर में ट्रेड, टेक्नोलॉजी और रेयर अर्थ जैसे संसाधनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक प्रतिबंध, टेक्नोलॉजी कंट्रोल और सप्लाई चेन पर दबाव बनाने की रणनीति तेजी से बढ़ी है। उनके इस बयान को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनके कार्यकाल में ट्रेड वॉर और टैरिफ पॉलिसी वैश्विक चर्चा का विषय बनी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की दुनिया में केवल हथियारों से ही नहीं, बल्कि व्यापार समझौतों, अत्याधुनिक तकनीक और दुर्लभ खनिजों की सप्लाई को रोककर भी देशों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे वैश्विक सहयोग के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ऐसी सोच दुनिया को बांटने का काम करती है। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि भारत ऐसे किसी भी मॉडल का समर्थन नहीं करता, जिसमें विकास को रोकने और निर्भरता पैदा करने की कोशिश हो।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, ताकि किसी भी देश या व्यवस्था की मनमानी का शिकार न बनना पड़े। प्रधानमंत्री के मुताबिक, टेक्नोलॉजी और संसाधनों का इस्तेमाल मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि किसी को डराने या नियंत्रित करने के लिए। उन्होंने वैश्विक सप्लाई चेन को भरोसेमंद, पारदर्शी और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित बनाने की वकालत की।
पीएम मोदी का यह बयान भारत की उस विदेश नीति को भी दर्शाता है, जिसमें वह किसी एक ध्रुव पर निर्भर रहने के बजाय बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है। जानकारों का मानना है कि यह संदेश केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए है जो अपनी आर्थिक और तकनीकी ताकत के दम पर वैश्विक संतुलन को प्रभावित करना चाहते हैं। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का यह संकेत साफ है कि भारत दबाव की राजनीति नहीं, बल्कि साझेदारी और समान विकास में विश्वास रखता है।



