
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरान के विदेश मंत्री Hossein Amir-Abdollahian से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बातचीत में क्षेत्रीय हालात, समुद्री सुरक्षा और विशेष रूप से भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि मौजूदा संकट के बावजूद भारत को तेल की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी।
पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में बढ़े तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। कई देशों को चिंता है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए स्थिति बेहद संवेदनशील हो जाती है। इसी कारण भारत सरकार लगातार प्रमुख तेल उत्पादक देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है ताकि ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखा जा सके।
बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थक रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा है। वहीं ईरानी विदेश मंत्री ने भरोसा दिलाया कि ईरान भारत के साथ अपने ऊर्जा सहयोग को मजबूत बनाए रखेगा और किसी भी परिस्थिति में तेल आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऊर्जा और रणनीतिक संबंध रहे हैं। भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में ईरान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री सहयोग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को लेकर भी कई समझौते हुए हैं। पश्चिम एशिया में मौजूदा परिस्थितियों के बीच यह बातचीत भारत की सक्रिय कूटनीति का संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। ऐसे में भारत का समय रहते कूटनीतिक प्रयास करना एक रणनीतिक कदम है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संतुलित विदेश नीति भी सामने आएगी। कुल मिलाकर, इस बातचीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा जरूरतों की रक्षा के लिए हर स्तर पर सक्रिय कूटनीति अपनाने को तैयार है।

