
अमेरिका को दशकों तक अवसरों की धरती माना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में वहां से लोगों के पलायन की खबरें चौंकाने वाली हैं। बताया जा रहा है कि लगभग 90 साल बाद ऐसी स्थिति बनी है जब बड़ी संख्या में लोग अमेरिका छोड़कर दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत है। न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में घरों के दाम और किराया आसमान छू रहे हैं। मध्यम वर्ग के लिए स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा भी बेहद महंगी हो चुकी हैं। इसके अलावा वीजा और इमिग्रेशन नियमों में सख्ती ने विदेशी पेशेवरों और छात्रों को प्रभावित किया है। एच-1बी वीजा धारकों और ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे लाखों लोगों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक ध्रुवीकरण भी एक बड़ी वजह बनकर उभरा है, जहां डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नीतियों के टकराव ने सामाजिक माहौल को प्रभावित किया है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों ने कुशल पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए आसान वीजा और बेहतर सामाजिक सुरक्षा का विकल्प दिया है, जिससे लोग वहां बसने का निर्णय ले रहे हैं। कोविड-19 महामारी के बाद रिमोट वर्क संस्कृति बढ़ी, जिससे लोगों को कहीं से भी काम करने की सुविधा मिली और उन्होंने कम खर्च वाले देशों में बसना शुरू किया। टेक सेक्टर में छंटनी और आर्थिक मंदी की आशंकाओं ने भी अनिश्चितता बढ़ाई है। कुल मिलाकर, अमेरिका अब भी एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों, आर्थिक दबाव और बेहतर विकल्पों की उपलब्धता ने पलायन की इस नई लहर को जन्म दिया है, जिसने 90 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।



