
यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक राजनीति में बार-बार यह सवाल उठता रहा है कि क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित ‘वेनेजुएला प्लान’ जैसे किसी मॉडल को यूक्रेन में लागू कर सकते हैं। वेनेजुएला में ट्रंप प्रशासन ने आर्थिक प्रतिबंध, राजनीतिक दबाव और कूटनीतिक अलगाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की रणनीति अपनाई थी। हालांकि यूक्रेन के संदर्भ में यह रणनीति रूस के लिए लगभग नामुमकिन मानी जा रही है और इसके पीछे कम से कम पांच ठोस कारण हैं। पहला कारण है भौगोलिक और सामरिक अंतर। वेनेजुएला अमेरिका से दूर एक लैटिन अमेरिकी देश है, जबकि यूक्रेन सीधे यूरोप के केंद्र में स्थित है और नाटो देशों की सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में किसी भी तरह की ‘प्लानिंग’ को बिना वैश्विक टकराव के अंजाम देना मुश्किल हो जाता है। दूसरा कारण है अंतरराष्ट्रीय समर्थन का समीकरण। यूक्रेन को अमेरिका, यूरोपीय संघ और नाटो देशों से खुला राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य समर्थन मिल रहा है, जबकि वेनेजुएला इस स्तर का वैश्विक समर्थन हासिल नहीं कर सका था। तीसरा बड़ा कारण है आर्थिक निर्भरता। रूस खुद प्रतिबंधों से जूझ रहा है, ऐसे में वह यूक्रेन पर वैसा आर्थिक दबाव नहीं बना सकता जैसा अमेरिका ने वेनेजुएला पर बनाया था। चौथा कारण है यूक्रेन की राष्ट्रीय पहचान और जनभावना। यूक्रेन में रूस विरोधी भावना काफी मजबूत हो चुकी है और वहां की जनता किसी बाहरी दबाव या सत्ता परिवर्तन की रणनीति को आसानी से स्वीकार नहीं करेगी। वेनेजुएला में आंतरिक राजनीतिक विभाजन गहरा था, जबकि यूक्रेन में युद्ध ने राष्ट्रीय एकजुटता को और मजबूत किया है। पांचवां और अहम कारण है वैश्विक शक्ति संतुलन। आज की दुनिया बहुध्रुवीय है, जहां चीन, यूरोप और अन्य शक्तियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ऐसे माहौल में किसी एक देश द्वारा ‘वेनेजुएला प्लान’ जैसा प्रयोग करना आसान नहीं है। इन सभी कारणों को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि ट्रंप के वेनेजुएला मॉडल को यूक्रेन में दोहराना रूस के लिए न केवल कठिन बल्कि व्यावहारिक रूप से असंभव है।

