बदलते पर्यावरण पर योगी आदित्यनाथ गंभीर, कहा – प्रकृति की रक्षा ही मानव रक्षा

बदलते जलवायु परिदृश्य और लगातार बढ़ती प्राकृतिक चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि हम पर्यावरण को बचाएंगे, तभी पर्यावरण हमें बचाएगा। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का मूल मंत्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियंत्रित शहरीकरण, पेड़ों की कटाई, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने धरती के संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप मौसम में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि पर्यावरण संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम मानकर न छोड़ें, बल्कि इसे जनभागीदारी का आंदोलन बनाएं। हर व्यक्ति यदि एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो बड़ा परिवर्तन संभव है। नदियों की स्वच्छता, जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और जैव विविधता की रक्षा जैसे कदमों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
सीएम ने स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं को भी आगे आने का आह्वान किया, ताकि युवाओं में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए उसकी रक्षा करना हम सबका नैतिक कर्तव्य है। सरकार स्तर पर वृक्षारोपण अभियान, जल संरक्षण योजनाएं और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जनसहयोग के बिना इनका पूरा लाभ नहीं मिल सकता।
मुख्यमंत्री का संदेश साफ है—यदि आज हम सचेत नहीं हुए तो आने वाला समय और अधिक कठिन हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हर नागरिक अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करे और पर्यावरण को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। यही कदम भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाएंगे।



