डेंगू-मलेरिया पर योगी सरकार का डिजिटल वार, मृत्यु दर में 99% तक कमी

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने संक्रामक बीमारियों के खिलाफ एक आक्रामक और तकनीक-आधारित अभियान छेड़ दिया है, जिसे सरकार “हेल्थ स्ट्राइक” के रूप में पेश कर रही है। खासतौर पर डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी लेकिन जानलेवा बीमारियों पर डिजिटल निगरानी, त्वरित पहचान और समयबद्ध उपचार की रणनीति ने चौंकाने वाले नतीजे दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में मृत्यु दर में 99 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है, जो बड़े पैमाने पर प्रशासनिक समन्वय, डेटा मॉनिटरिंग और जमीनी कार्रवाई का परिणाम है।
राज्य सरकार ने जिलों से लेकर वार्ड स्तर तक मरीजों का रियल-टाइम डेटा जुटाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किए हैं। जैसे ही किसी क्षेत्र में बुखार के मामलों में बढ़ोतरी दिखती है, तुरंत मेडिकल टीमें, फॉगिंग यूनिट और साफ-सफाई अभियान सक्रिय कर दिए जाते हैं। अस्पतालों को बेड, प्लेटलेट्स और दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होती है, जिससे मरीजों को भटकना न पड़े। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को भी मोबाइल ऐप के जरिए सर्विलांस में जोड़ा गया है, ताकि घर-घर जाकर लक्षणों की पहचान और शुरुआती सलाह दी जा सके।
इस डिजिटल मॉडल का एक बड़ा फायदा यह हुआ कि बीमारी फैलने से पहले ही हॉटस्पॉट चिन्हित होने लगे। जिन इलाकों में पहले हर साल भारी संख्या में मरीज मिलते थे, वहां अब समय रहते रोकथाम संभव हो पा रही है। स्कूलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों को भी जिम्मेदारी दी गई है कि जलभराव न हो और जागरूकता अभियान लगातार चलते रहें।
सरकार का दावा है कि बेहतर रेफरल सिस्टम, एम्बुलेंस नेटवर्क और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता ने गंभीर मरीजों की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। मेडिकल कॉलेजों को नोडल सेंटर बनाया गया है, जहां से उपचार प्रोटोकॉल और तकनीकी मार्गदर्शन जिलों तक पहुंचता है। यही वजह है कि अब संक्रमण का डर पहले जैसा नहीं रह गया और लोग समय पर जांच कराने के लिए आगे आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि डेटा-आधारित यह मॉडल इसी तरह सख्ती से लागू होता रहा, तो आने वाले वर्षों में डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियां नियंत्रित दायरे में आ सकती हैं। फिलहाल, मृत्यु दर में आई भारी गिरावट को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है, जो यह संकेत देती है कि तकनीक और प्रशासन जब साथ चलते हैं, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर असाधारण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।



