
असम की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए कथित झूठे और निराधार आरोपों को लेकर 500 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर करने का फैसला किया। मुख्यमंत्री सरमा ने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन तथ्यों से परे जाकर किसी की छवि धूमिल करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता लगातार उनके खिलाफ भ्रामक बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा बल्कि सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सरमा ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का स्वागत है, परंतु झूठ फैलाना और जनता को गुमराह करना गंभीर विषय है, जिसके खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाना जरूरी हो जाता है। इस कदम को राज्य की सियासत में बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इतनी बड़ी रकम का मानहानि दावा अपने आप में असाधारण है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे आने वाले दिनों में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और तेज हो सकती है। वहीं कांग्रेस की ओर से भी पलटवार के संकेत मिले हैं और पार्टी नेताओं का कहना है कि वे अपने बयान पर कायम हैं तथा अदालत में मजबूती से पक्ष रखेंगे। इस घटनाक्रम ने राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और दोनों दलों के समर्थकों के बीच बहस छिड़ गई है। आम जनता की नजर अब इस बात पर है कि अदालत में मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इससे राजनीतिक बयानबाजी की मर्यादा तय करने में कोई नई मिसाल कायम होगी। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री सरमा का यह कदम चुनावी और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में असम की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।



