
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Dattatreya Hosabale ने शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि “ज्ञान, कौशल और संस्कार तीनों का समन्वय ही शिक्षा है।” उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण विकास पर केंद्रित होना चाहिए।
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ज्ञान से सोच का विकास होता है, कौशल से व्यक्ति अपनी क्षमताओं का उपयोग करना सीखता है और संस्कार समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा करते हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में इन तीनों पहलुओं के संतुलन पर जोर दिया।
संबोधन की प्रमुख बातें:
- 📚 शिक्षा को ज्ञान तक सीमित नहीं रखने की बात कही।
- 🛠️ कौशल विकास को जरूरी बताया।
- 🌱 संस्कारों को व्यक्तित्व निर्माण का आधार बताया।
- 👥 समग्र विकास वाली शिक्षा पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में युवाओं को ऐसे शिक्षा मॉडल की आवश्यकता है, जो उन्हें रोजगार योग्य बनाने के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक भी बनाए।
नोट: यह दत्तात्रेय होसबाले के कार्यक्रम में दिए गए विचारों का विवरण है। शिक्षा के स्वरूप और प्राथमिकताओं को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं।



