


महाराष्ट्र में शिक्षा विभाग ने मराठी भाषा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जिन स्कूलों में निर्धारित नियमों के अनुसार मराठी भाषा का शिक्षण नहीं किया जा रहा है, उनकी मान्यता रद्द किए जाने पर विचार किया जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को मजबूत करना बताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, सभी स्कूलों को राज्य के नियमों का पालन करना अनिवार्य है, और मराठी भाषा को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देना जरूरी है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले के बाद निजी स्कूलों में हलचल बढ़ गई है और कई स्कूल अपने पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी कर रहे हैं।