
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बिश्केक में अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से इतर हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान यूक्रेन युद्ध भी प्रमुख मुद्दों में रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई उम्मीद और उत्साह पैदा करता है। उन्होंने लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। भारत लगातार यह रुख रखता आया है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।
दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की पूरी श्रृंखला पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
बैठक में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग भी चर्चा का हिस्सा रहा। भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक 2026 की पहली छमाही में दोनों देशों के बीच व्यापार कारोबार में वृद्धि दर्ज की गई है।
ऊर्जा सुरक्षा भारत-रूस संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच तेल, गैस और उर्वरक सहित ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा रक्षा सहयोग और भविष्य की रणनीतिक परियोजनाओं पर बातचीत को अहम माना जा रहा है।
मोदी-पुतिन बैठक की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह SCO के ऐसे मंच पर हुई है, जहां भारत, रूस और चीन समेत कई प्रमुख देश एक साथ मौजूद हैं। ऐसे समय में भारत का शांति और संवाद पर जोर उसकी स्वतंत्र विदेश नीति के रुख को भी दर्शाता है।
बैठक के बाद दोनों नेताओं ने एक बार फिर भारत-रूस के मजबूत रणनीतिक संबंधों का संकेत दिया। हालांकि यूक्रेन युद्ध पर भारत का संदेश स्पष्ट रहा कि संघर्ष को लंबा खींचने के बजाय शांति की दिशा में ठोस कदम उठाना मानवता और वैश्विक स्थिरता के हित में है।



