
गंगा नदी के किनारे बढ़ते अतिक्रमण के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि गंगा देश की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है और इसके किनारों पर अवैध निर्माण तथा अतिक्रमण पर्यावरण और नदी के प्राकृतिक प्रवाह के लिए खतरा बन सकते हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों से पूछा कि गंगा के तटों पर अतिक्रमण को रोकने और हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नदी तटों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी अहम हिस्सा है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार यह बताए कि किन-किन इलाकों में अतिक्रमण की स्थिति है और उसे हटाने के लिए क्या कार्ययोजना बनाई गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा के तटों पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण से नदी के प्राकृतिक बहाव, जैव विविधता और आसपास के पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश गंगा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।sup



