मां कालरात्रि की आरती विधि: चैत्र नवरात्र के सातवें दिन ऐसे करें पूजा, दूर होंगे सभी संकट

चैत्र नवरात्र का सातवां दिन मां दुर्गा के उग्र स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित होता है। इस दिन भक्त विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की पूजा-अर्चना करते हैं। मां कालरात्रि को दुष्टों का संहार करने वाली और अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। उनका स्वरूप भले ही भयावह हो, लेकिन वे अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं, इसलिए उन्हें “शुभंकरी” भी कहा जाता है।
मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन के सभी भय, बाधाएं और संकट दूर हो जाते हैं। विशेष रूप से जो लोग किसी तरह के डर, शत्रु बाधा या नकारात्मक ऊर्जा से परेशान हैं, उनके लिए इस दिन की पूजा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। इस दिन मां को गुड़, सिंघाड़ा और काले चने का भोग लगाने का विशेष महत्व है।
पूजा के दौरान सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ करें। मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और उन्हें लाल फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप के साथ विधिपूर्वक पूजा करें और अंत में मां की आरती जरूर करें। आरती करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है और मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मां कालरात्रि की आरती करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए। आरती के दौरान “जय कालरात्रि माता” का जयघोष करने से वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां की आरती करने पर जीवन के सभी दुख समाप्त हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
नवरात्र का यह दिन साधना और आत्मबल को मजबूत करने का भी प्रतीक है। मां कालरात्रि अपने भक्तों को साहस, शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं। इसलिए इस दिन ध्यान, मंत्र जाप और आरती का विशेष महत्व होता है।
अगर आप भी जीवन की परेशानियों से मुक्ति चाहते हैं, तो चैत्र नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की विधिपूर्वक पूजा और आरती जरूर करें। मां की कृपा से हर संकट टल जाएगा और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा।



