धर्म-आस्था

अष्टमी पूजा में रह गई चूक? रात में करें ये दिव्य पाठ, मिलेगा पूर्ण फल और कृपा

अष्टमी पूजा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान अष्टमी तिथि पर देवी महागौरी या दुर्गा के आठवें स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत, हवन और पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन कई बार जल्दबाजी या अनजाने में पूजा में कुछ कमी रह जाती है। ऐसे में लोग चिंतित हो जाते हैं कि कहीं उनकी पूजा अधूरी तो नहीं रह गई।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि अष्टमी पूजा में कोई चूक हो जाए तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। शास्त्रों में बताया गया है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं होती। यदि दिन में पूजा पूरी न हो पाई हो, तो रात के समय कुछ विशेष मंत्रों और पाठों का जप करके उस कमी को पूरा किया जा सकता है।

रात्रि के समय “दुर्गा सप्तशती” का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से इसके “कवच”, “कीलक” और “अर्गला स्तोत्र” का पाठ करने से अधूरी पूजा का फल पूर्ण हो जाता है। इसके अलावा “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का 108 बार जप करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मान्यता है कि देवी दुर्गा भक्त की भावना को देखती हैं, न कि केवल विधि-विधान की पूर्णता को। यदि किसी कारणवश पूजा में कोई त्रुटि रह भी जाए, तो सच्चे मन से की गई प्रार्थना उसे पूर्ण कर देती है। इसलिए मन में किसी प्रकार का भय या दोषभाव नहीं रखना चाहिए।

इसके साथ ही रात में दीपक जलाकर देवी के समक्ष क्षमा प्रार्थना करना भी बहुत लाभकारी माना गया है। “या देवी सर्वभूतेषु क्षमा रूपेण संस्थिता” मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और पूजा का फल और अधिक बढ़ जाता है।

कुल मिलाकर, अष्टमी पूजा में यदि कोई चूक रह गई हो तो उसे रात के समय किए गए विशेष पाठ और भक्ति भाव से पूरा किया जा सकता है। श्रद्धा और विश्वास ही पूजा का सबसे बड़ा आधार है, और यही भक्त को पूर्ण फल प्रदान करता है।

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