सावन में कब है कामिका और पुत्रदा एकादशी? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पारण समय

सावन मास में आने वाली कामिका एकादशी और पुत्रदा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इन दोनों एकादशी व्रतों को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं।
कामिका एकादशी सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी अर्पण और विष्णु मंत्रों का जाप करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।
वहीं, पुत्रदा एकादशी सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस व्रत को संतान सुख और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर आशीर्वाद की कामना करते हैं।
एकादशी व्रत में तिथि और पारण का विशेष महत्व होता है। व्रत रखने वाले लोगों को सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि में शुभ समय देखकर पारण करने की परंपरा बताई गई है। अलग-अलग शहरों में पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन सात्विक जीवन, संयम और भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। सावन की इन एकादशियों पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।



