धर्म-आस्था

जगन्नाथ रथ यात्रा: जानिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों के नाम

ओडिशा के पुरी में होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस परंपरा को आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।

भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम ‘नंदीघोष’ है। यह तीनों रथों में सबसे बड़ा और सबसे आकर्षक माना जाता है। मान्यता है कि इस रथ पर भगवान जगन्नाथ विराजमान होते हैं। नंदीघोष रथ में 16 पहिए होते हैं और इसका रंग लाल व पीला होता है।

भगवान बलभद्र के रथ का नाम ‘तालध्वज’ है। यह रथ सफेद और लाल रंग का होता है और इसमें 14 पहिए होते हैं। बलभद्र जी को शक्ति और धर्म के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

देवी सुभद्रा के रथ का नाम ‘दर्पदलन’ या ‘पद्मध्वज’ है। यह तीनों रथों में सबसे छोटा होता है और इसमें 12 पहिए होते हैं। सुभद्रा जी का रथ पीले और काले रंग से सजाया जाता है।

रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु इन रथों को खींचने के लिए एकत्र होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रथ खींचने और भगवान के दर्शन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यह यात्रा पुरी मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है और फिर भगवान अपने धाम वापस लौटते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिक आस्था का एक अनूठा उत्सव भी है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

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