धर्म-आस्था

महाकाल को क्यों चढ़ाई जाती है राख? जानिए भस्म आरती का रहस्य

उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की विशेष पूजा मानी जाती है, जिसमें भस्म अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। श्रद्धालु इसे शिव भक्ति का अद्भुत और रहस्यमयी रूप मानते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म संसार की नश्वरता का प्रतीक है। भगवान शिव को संहार और सृजन के देवता के रूप में माना जाता है, इसलिए भस्म उन्हें जीवन के अंतिम सत्य और मोह-माया से मुक्ति के संदेश से जोड़ती है।

कहा जाता है कि महाकाल की भस्म आरती में भगवान शिव को भस्म से श्रृंगार किया जाता है। यह परंपरा शिव के तपस्वी और वैरागी स्वरूप को दर्शाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस आरती के दर्शन से आध्यात्मिक शांति और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती सुबह ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने के लिए पहुंचते हैं। आरती के दर्शन को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

पौराणिक कथाओं में भी भगवान शिव के भस्म धारण करने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि शिव अपने भक्तों को यह संदेश देते हैं कि जीवन में अहंकार और सांसारिक मोह से ऊपर उठकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।

महाकाल की भस्म आरती केवल एक पूजा विधि नहीं, बल्कि शिव के दर्शन और जीवन के गहरे आध्यात्मिक संदेश का प्रतीक मानी जाती है। यही वजह है कि देश-विदेश से श्रद्धालु इस दिव्य आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

Zee NewsTimes

Founded in 2018, Zee News Times has quickly emerged as a leading news source based in Lucknow, Uttar Pradesh. Our mission is to inspire, educate, and outfit our readers for a lifetime of adventure and stewardship, reflecting our commitment to providing comprehensive and reliable news coverage.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button